नयी दिल्ली: देश के थोक जिंस बाजारों के लिए पिछला सप्ताह मिला-जुला रहा। रविवार, 03 मई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू स्तर पर चावल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि गेहूं और चीनी के भाव स्थिर बने हुए हैं। आम उपभोक्ता की रसोई से जुड़ी दालों और खाद्य तेलों के बाजार में आपूर्ति और मांग के असंतुलन के कारण कीमतों में 'घट-बढ़' का सिलसिला जारी रहा।
अनाज और मीठे बाजार की स्थिति
अनाज मंडी में चावल के औसत थोक भाव में इस सप्ताह 11 रुपये की कमी देखी गई, जिसके बाद यह 3,836 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बंद हुआ।
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स्थिरता: गेहूं की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ और यह 2,781 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बना रहा। इसी तरह, आटे का भाव भी 3,273 रुपये पर टिका रहा।
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चीनी और गुड़: चीनी के दाम पिछले स्तर पर ही बरकरार रहे, हालांकि गुड़ की मांग में कमी आने से इसकी थोक कीमत में 13 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
दालों और खाद्य तेलों में उठापटक
खाद्य तेलों और दालों के बाजार में सबसे अधिक अस्थिरता देखी गई:
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दालें: तुअर (अरहर) दाल की कीमतों में 21 रुपये का उछाल आया। मूंग दाल भी 20 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई। दूसरी ओर, चना और मसूर दाल के खरीदारों को थोड़ी राहत मिली, क्योंकि इनके भाव क्रमशः 24 रुपये और 6 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे गिरे।
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खाद्य तेल: पाम ऑयल में इस सप्ताह 72 रुपये की जोरदार तेजी रही, जबकि मूंगफली का तेल भी 31 रुपये महंगा हुआ। हालांकि, सरसों तेल (24 रुपये की गिरावट), सूरजमुखी और वनस्पति तेल के दामों में नरमी आने से मध्यम वर्गीय परिवारों को कुछ राहत मिली है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की आहट और सरकारी स्टॉक की स्थिति जिंसों के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तेलों में आयात शुल्क और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के संकेतों के बीच पाम ऑयल की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, थोक बाजारों में चावल की नरमी खुदरा कीमतों पर क्या असर डालती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।